| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 |
کاش هوایی بیاید
پنجره را بگشا
نفسم تنگ است
آسمانم ابری است
نسیمی می اید و
قطره ی بارانی
چکیده بر
برگ اوراق گشته حافظ
چای ام را می نوشم و
حافظی می خوانم
نوشته در گوشه ی خط دار ذهنم
به یاد تو
(خون شد دلم به یاد تو هر گه که در چمن
بند قبای غنچه گل می گشاد باد)
سعید ممدوحی