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قطره ای آب
به چهار گوشه حیاط
چکید.
قُمری
دل در منقار
پرید.
زمان دید
تکان نخورد.
آرزوهای من
بر لبِ حوض
نشسته اند،
موهای سپید.
قطره
از کجا آمد؟
پیامش
در دل من ریخت.
کسی
در زد
و رفت.
قُمری
برگشت،
اما
شب
فرا رسید.
انتظار
جایی ست
لب حوض.
دکتر محمد گروکان