| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 |
باید گذر کرد،
باید گذشت،
همراه جوش و خروش نهر؛
و من،
مسافر مسیر آب،
حال خواه برکه باشد،
خواه سراب،
یا که مرداب.
مقصد رهایی است.
باید بود رها،
رها شد و رها ماند،
در هوای مه گرفته کوچه.
مثل کوچه در حسرت رهگذرم.
من و کوچه ناجی همیم.
من و کوچه تنها مانده ایم،
میشنوی؟
تنها
علی پورزارع