| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 |
تو سراب موج گندم ، تو شراب سیب داری
تو سر فریب – آری! – تو سر فریب داری
لب بی وفای او کی به تو شهد می چشاند
چه توقعی است آخر که از این طبیب داری؟!
“فاضل نظری”