| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | 2 | 3 | ||||
| 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 |
| 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 |
| 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 |
| 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 |
تصّور کن که سنگی گشته عاشق
چه معشوقی که بر او گشته لایق
یقین آبی روان آمد که بخشید
به قلب ِ سنگ ِ خارایی شقایق
چنان این گل به قلبش خانه کرده
که جسم ِ سنگیَش ویرانه کرده
اگر عاشق شدی اینگو شو یار
که آب این سنگ را مستانه کرده
جواد قنبریان