| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | ||||||
| 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
| 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
| 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
| 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 |
وتو
چه بخواهی
چه نخواهی
من شعرم را
زیر درختانی که
تو قطع کردی
با زمزمه کودکان دیروز
سرودم
و
چه سرد
سخت
سست
مردمانی
که باران را
افسانه میدانستند
و
کودکی
که دریغ نکرد
ابیاری ان را
با اشک
چشمانش
و لبخند
درخت
امروز
زیباست
زیباست
سیاوش دریابار