ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
1 | ||||||
2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 |
23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 |
30 | 31 |
دستم را که گرفت
شب شد
عصارهی لبهایش
انگبین در دشت تریاک
او را در آغوش کشیدم
دستانش بوی کافور میداد
پیامآور خاموشی
میگریخت
نگاهش که کردم
چشمانم دیگر نور نداشت
ستارهای بود که خاموش شد
عطیه هجرتی